टाटा ग्रुप और IISc बेंगलुरु का साझेदारी: 500 करोड़ की मदद से बनेगा मेडिकल स्कूल
टाटा ग्रुप और IISc बेंगलुरु का साझेदारी: 500 करोड़ की मदद से बनेगा मेडिकल स्कूल
टाटा ग्रुप ने भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु के साथ साझेदारी कर कैंपस में एक आधुनिक मेडिकल स्कूल स्थापित करने का निर्णय लिया है। इस उद्देश्य के लिए टाटा ग्रुप ने 500 करोड़ रुपये का योगदान देने का वादा किया है।
मेडिकल स्कूल का उद्देश्य और विशेषताएं
'टाटा IISc मेडिकल स्कूल' एक उत्कृष्ट केंद्र होगा, जो भारत में चिकित्सा अनुसंधान और शिक्षा का नया मॉडल विकसित करेगा। यह स्कूल बुनियादी विज्ञान, इंजीनियरिंग, और क्लिनिकल साइंस को आपस में जोड़कर चिकित्सा के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करेगा।
यहां पर विशेष रूप से ऑन्कोलॉजी, कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, मधुमेह, मेटाबॉलिक डिसऑर्डर्स, संक्रामक रोगों, एकीकृत चिकित्सा, और सार्वजनिक स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
डिग्री प्रोग्राम और वैश्विक सहयोग
मेडिकल स्कूल इंटीग्रेटेड MD-PhD और डुअल-डिग्री प्रोग्राम्स की पेशकश करेगा, जिसका उद्देश्य चिकित्सा वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों की एक नई पीढ़ी तैयार करना है। छात्रों को मेडिकल स्कूल के साथ-साथ IISc के विज्ञान और इंजीनियरिंग लैब्स में प्रशिक्षण मिलेगा।
इसके अतिरिक्त, यह स्कूल वैश्विक मेडिकल संस्थानों के साथ सहयोग करेगा ताकि छात्रों को वैश्विक स्तर की विशेषज्ञता मिल सके और वे सर्वश्रेष्ठ अभ्यास अपना सकें।
नेताओं की प्रतिक्रियाएं
टाटा सन्स के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने कहा, "भारत में स्वास्थ्य सेवा सबसे बड़ी चुनौती और अवसर दोनों है। आधुनिक तकनीक के माध्यम से निदान से लेकर देखभाल तक हर क्षेत्र में क्रांति लाई जा सकती है। IISc की अग्रणी शोध और वैश्विक सहयोग के कारण यहां प्रशिक्षित डॉक्टर और वैज्ञानिक भारतीय स्वास्थ्य सेवा को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे।"
IISc के निदेशक प्रो. जी. रंगराजन ने इस योगदान के लिए टाटा ग्रुप का आभार व्यक्त करते हुए कहा, "विज्ञान और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में योगदान के बाद अब हमें चिकित्सा के क्षेत्र में नई दिशाएं बनाने का अवसर मिला है। टाटा और IISc की साझेदारी भारत और दुनिया के लिए सस्ती और प्रभावी स्वास्थ्य समाधान उपलब्ध कराएगी।"
भविष्य की राह
यह मेडिकल स्कूल न केवल देश में चिकित्सा अनुसंधान और शिक्षा का मानक बनेगा बल्कि भारत को वैश्विक स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में अग्रणी बनाने में मदद करेगा.

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